भोपाल। मध्य प्रदेश की दूसरी महिला मुख्य सचिव वीरा राणा को केंद्र सरकार ने छह माह की सेवावृद्धि दे दी। वह 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो रही थीं। सरकार नहीं चाहती थी कि नए मुख्य सचिव की नियुक्ति की गेंद चुनाव आयोग के पाले में जाए, इसलिए राज्य सरकार ने उन्हें छह माह की सेवावृद्धि दिए जाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। जिसे केंद्र ने स्वीकार कर शुक्रवार को आदेश जारी कर दिए।
एक के बाद एक मुख्य सचिव को सेवावृद्धि
यह पहला अवसर है जब एक के बाद एक मुख्य सचिव को सेवावृद्धि दिलवाई गई है। इसके पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवरा ज सिंह चौहान ने इकबाल सिंह बैंस को सेवावृद्धि दिलाई थी। विधानसभा चुनाव के समय 30 नवंबर 2023 को तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस की सेवावृद्धि की दूसरी अवधि समाप्त हो रही थी, तब शिवराज सरकार ने नए मुख्य सचिव की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव चुनाव आयोग को भेजा था। तीन नामों की सूची में वरिष्ठता के आधार पर 1988 बैच की अधिकारी वीरा राणा का नाम सबसे ऊपर था। आयोग ने उनके नाम पर सहमति दी और सरकार ने प्रभारी मुख्य सचिव बना दिया।
मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने जताया विश्वास
डा. यादव सीएम बने और उन्होंने राणा पर विश्वास जताते हुए उन्हें पूर्णकालिक मुख्य सचिव नियुक्त कर दिया। 31 मार्च को वे सेवानिवृत्त हो रही हैं और इसके पहले यदि मुख्य सचिव का निर्णय नहीं होता तो चुनाव की घोषणा होते हुए नियुक्ति की गेंद चुनाव आयोग के पाले में चली जाती जो सरकार नहीं चाहती थी, इसलिए केंद्र सरकार के स्तर पर सैद्धांतिक सहमति होने के बाद मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव की ओर से आठ मार्च को प्रस्ताव भेजा गया। शुक्रवार को कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने छह माह (एक अप्रैल 2024 से 30 सितंबर 2024) की सेवावृद्धि दे दी।
सेवावृद्धि पाने वाली छठी अधिकारी
वीरा राणा मुख्य सचिव पद पर सेवावृद्धि पाने वाली प्रदेश की छठी अधिकारी हैं। सन 2000 के बाद आर परशुराम, बीपी सिंह और इकबाल सिंह बैंस को सेवावृद्धि मिल चुकी है। लगातार दो बार सेवावृद्धि अकेले इकबाल सिंह बैंस को छह-छह माह की मिली थी।
संजय बंदोपाध्याय को नहीं मिल पाएगा अवसर
प्रदेश में 1988 बैच के एक और अधिकारी संजय बंदोपाध्याय हैं, जो पिछले माह ही केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश भेजे गए हैं। वे 31 अगस्त हो सेवानिवृत्त हो जाएंगे। जबकि, वीरा राणा सितंबर तक मुख्य सचिव रहेंगी यानी बंदोपाध्याय को मुख्य सचिव बनने का मौका नहीं मिलेगा।


