जया एकादशी का व्रत 20 फरवरी को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि का आरंभ 19 फरवरी को सुबह आठ बजकर 50 मिनट पर होगा और 20 फरवरी सुबह नौ बजकर 52 मिनट तक रहेगा। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार यह व्रत 20 फरवरी को रखा जाएगा और व्रत का पारण 21 फरवरी को किया जाएगा। जया एकादशी का व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस दिन व्रत करने से पापों का अंत होता है और मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान का आशीर्वाद मिलता है। इस व्रत में कथा का पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है और घर में मां लक्ष्मी का वास होता है।
जानकारी देते हुए ज्योतिषाचार्य पंडित द्विजेन्द्र व्यास ने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ ही पूरी आस्था और श्रद्धा से उनका व्रत किया जाता है। शाम को पूजा करके लोग फलाहार करते हैं। जया एकादशी के व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है। इस व्रत के दिन आयुष्मान योग के साथ, त्रिपुष्कर योग और प्रीति योग भी बन रहा है। इस वजह से जया एकादशी के दिन व्रत करने से व्रतियों को विशेष फल की प्राप्ति होगी। भगवान विष्णु के आशीर्वाद से उनके घर में कभी धन धान्य की कमी नहीं होगी।
व्रत का महत्व
पंडित व्यास ने बताया कि जया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा माधव स्वरूप में की जाती है। इस व्रत को करने से आपके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और आपके लिए भी परलोक का रास्ता तय होता है। इस व्रत के महत्व के बारे में बताते हुए स्वयं भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को कहा था कि इस दिन का उपवास करने से व्यक्ति को ब्रह्महत्या का पाप नहीं लगता है।
व्रत की पूजाविधि
जया एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर केले के पेड़ की पूजा करें और उस पर जल चढ़ाएं। इसके बाद पूजा करके भगवान विष्णु को पीले फल, पीले मिष्ठान और पीले वस्त्र दान करें। भगवान की धूप-दीप से आरती करें और तुलसी दल के साथ पंचामृत का भोग लगाएं। भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करें और मां लक्ष्मी की पूजा करें। जया एकादशी के व्रत की कथा का पाठ करें। इस दिन अनाज और फलों का दान भी करना चाहिए। 20 फरवरी को जया एकादशी व्रत वाले दिन सुबह स्नान के बाद घी का दीपक जलाएं और भगवान विष्णु का आह्वान करें। इससे भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं और घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है। इस दिन जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु को प्रसन्न करने के लिए उन्हें पीले वस्त्र, पीले फूल, पीले रंग की पुष्प माला, मिठाई, फल आदि अर्पित करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। STPV. live एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)


